वैज्ञानिकों ने किया चमत्कारी दावा, हिन्दू पूजा पद्धति में होने वाले हवन से होता है वातावरण शुद्ध

विश्व में बड़ी समस्याओं में से एक वायु प्रदूषण भी है। जिसे विश्व के लगभग सभी देश खत्म या कम करने के लिए प्रयास कर रहे है। भारत में दिल्ली सहित कई ऐसे शहर हैं जो विश्व के सबसे प्रदूषित शहर में शामिल हो चुके है। भारत सरकार इस वायु प्रदूषण की समस्या को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसी स्थिति में भारत के एक कॉलेज ने अपनी रिसर्च में सिद्ध किया है की वैदिक काल की विद्याओं से हम वायु प्रदूषण को कम कर सकते है।

महाराष्ट्र के पुणे शहर के फर्ग्युसन कॉलेज में एक रिसर्च स्कॉलर के रूप में कार्य करने वाले प्रणय अभंग ने वैदिक काल में उपयोग किये जाने वाले अग्निहोत्र (हवन) पर रिसर्च की है। इस रिसर्च में उन्होंने यज्ञ के समय और बाद में होने वाले परिवर्तन पर कुछ टेस्ट किये जिसके बाद वो इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके है की इस यज्ञ को करने से वायु प्रदूषण कम होगा।

प्रणय के अनुसार अग्निहोत्र के कई लाभ होते हैं। उन्होंने कहा की हमने इस यज्ञ से वायुमंडल में होने वाले प्रभाव पर प्रयोग किया है। हमने लगातार 3 दिन तक सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय इस अग्निहोत्र को किया। इस यज्ञ में हमने गाय के गोबर कंडे सूर्योदय और सूर्यास्त के तय समय पर गाय के घी और चावल के साथ वैदिक मंत्र का उच्चारण करके आहुति दी थी और इन प्रयोगों से पाया है कि आसपास के वातावरण में सूक्ष्म जीव कम हुए है।

 

इस हवन में हमने 3 चरणों में टेस्ट किया है पहला चरण यज्ञ शुरू करने से पहले, दूसरा हवन करते समय और तीसरा हवन ख़त्म होने के बाद। Nutrient Agar Plates का उपयोग करके हमने पाया कि आसपास के वातावरण में 80 से 90 प्रतिशत सूक्ष्म जीवों की संख्या में कमी आई है। इस यज्ञ से एयर पॉल्यूटेंट्स में भी कमी आई है। इस यज्ञ से वातावरण प्रदूषण में कम होने के परिणाम को चेक करने के लिए हैंडी एयर सैंपलर की मदद ली गई थी। इस से हमें पता चला की इस यज्ञ को करने से वातावरण में प्राइमरी एयर पॉल्यूटेंट्स ऑक्साइड ऑफ़ नाइट्रोजन और ऑक्साइड ऑफ़ सल्फर में कमी आई है। प्रणय की माने तो अगर इस यज्ञ को बड़े पैमाने किया जाए तो हम काफी हद तक वायु प्रदूषण कम कर सकते है।

 

ग़ौरतलब है कि मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में 1984 में एक दुर्घटना हुई थी जिसे भोपाल गैस कांड भी कहा जाता है। इस घटना से भोपाल के कई लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस दुर्घटना के समय भोपाल के एक कुशवाह परिवार ने इस यज्ञ को किया था जिससे कुछ समय में उनके घर के आसपास आइसो साइनाइड गैस का असर कम हो गया था। कुशवाह परिवार के लोगो की माने तो उस समय उनके इस यज्ञ को करने से यज्ञ द्वारा उत्पन्न धुएँ ने एक कवर बना दिया था जिससे मिथाइल आइसो साइनाइड गैस का असर उनके परिवार के लोगों पर नहीं पड़ा और आज भी उनका परिवार पूर्ण रूप से स्वस्थ है।

Source:- Punctured Satire

 

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